भृकुटी महल चढ़ देख पियारे
भृकुटी महल चढ़ देख पियारे, जागे ज्योति अपारा ॐ|| सोहम सोहम जपते जपते, पहुंचो दशमें द्वारा ॐ|| मेरुदण्ड में बंकनाल है, उलटी गंग कहावे ॐ|| <!--more-- उसी गंग में सुन लो प्यारे, जो कोई घुसकर नहावे ॐ | प्रणवयान से ऊंचा चढ़कर, सुखमणिगढ़ में जाए ॐ || तनका भान भुलाके वहां से, सोहम सोहम गावे ॐ || वहां से ऊंचा बेहद ऊंचा ब्रह्मशिखर पे जावे ॐ || ॐ धोनी से चढ़ते चढ़ते, निश्चल घूमेरी आवे ॐ || अपने आप, आप अपने में, निर्विकल्प निरवाणी ॐ || शिवानंद गुरु केवल चेतन, निजानंद आनंदी ॐ || भृकुटी महल चढ़ देख पियारे, जागे ज्योति अपारा ॐ|| सोहम सोहम जपते जपते, पहुंचो दशवे द्वारा ॐ ||
