Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
22 May 2021·1 min read·

नींद नहीं आती है

आँखों की पुतलियाँ जब.. एक साथ नहीं ठहर पाती.. तो नींद नहीं आती है..

उमर भर के सफर के यादों को.. मन जब उलटता-पुलटता है.. तो नींद नहीं आती है..

गीली पलकों से झरते झरने.. बीहड़ रातों में.. जब शोर मचाती है.. तो नींद नहीं आती है..

© राहुल देवाशीष