शिक्षक का सम्मान
बड़ी गजब का संशय, जो देश का भविष्य के कर्णधार। अपने भविष्य के लिए, नियोजित बन बैठे। कैसे सँवारे इस नौनिहालों के भविष्य को। मान-सम्मान का क्या, शिक्षक निरादर लगती मानो।
कभी शिक्षक की होती, आदर ऐसी। राज-काज पर था, प्रभाव। आज दोयम दर्जे का क्यों व्यवहार? क्या छूटा, कमी क्या रह गई?
जिनकी कभी होती थी, विद्वता की चर्चा। देश-विदेश में थी ख्याति कभी। क्या चुके, लेन-देन की चीज नहीं थी, शिक्षा। शिक्षा हो व्यवहारिक, ना हो बाजारीकरण।
शिक्षक का सम्मान लौटे, ऐसा संभव तभी। शिक्षा का गौरव लौटे, स्वाध्याय हम सभी करे। गुरु-शिष्य परम्परा का पालन करे, घर-घर गुरुकुल हो। ऐसी संस्कार का करे संकलन हम,शिक्षक का सम्मान बढ़े।
नौनिहालों का भविष्य, करे संरक्षित।
#TeachersDay
©#मिथिलेश कुमार
