Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·13·

शिक्षक का सम्मान

बड़ी गजब का संशय, जो देश का भविष्य के कर्णधार। अपने भविष्य के लिए, नियोजित बन बैठे। कैसे सँवारे इस नौनिहालों के भविष्य को। मान-सम्मान का क्या, शिक्षक निरादर लगती मानो।

कभी शिक्षक की होती, आदर ऐसी। राज-काज पर था, प्रभाव। आज दोयम दर्जे का क्यों व्यवहार? क्या छूटा, कमी क्या रह गई?

जिनकी कभी होती थी, विद्वता की चर्चा। देश-विदेश में थी ख्याति कभी। क्या चुके, लेन-देन की चीज नहीं थी, शिक्षा। शिक्षा हो व्यवहारिक, ना हो बाजारीकरण।

शिक्षक का सम्मान लौटे, ऐसा संभव तभी। शिक्षा का गौरव लौटे, स्वाध्याय हम सभी करे। गुरु-शिष्य परम्परा का पालन करे, घर-घर गुरुकुल हो। ऐसी संस्कार का करे संकलन हम,शिक्षक का सम्मान बढ़े।

नौनिहालों का भविष्य, करे संरक्षित।

#TeachersDay

©#मिथिलेश कुमार