Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
18 Mar 2022·1 min read·13·

होली जिन्दा रहेगी

हो सकता है आप कहीं किसी रास्ते से गुजर रहे हों...और अचानक से सनसनाता हुआ पानी का धार या रंगों के फुहार आकर आपपर गिरे... तो गुस्सा न हों और न उन बच्चों को डांटे...बल्कि, खुद को भाग्यशाली समझें...कि आपको उन नादान हाथों ने चुना है, जो हमारी संस्कृति को जिन्दा रखे हुए हैं...जो उत्सव को जिन्दा रखे हुए हैं ! ऐसे नासमझ बच्चें आपको कम ही मिलेंगे...अब ऐसे बच्चें सड़क चलते मिलते कहाँ हैं ! क्यूंकि, आजकल सारे समझदार बच्चे विडियोगेम, डोरेमोन और इंटरनेट की दुनियां से निकलते कहाँ हैं ? तो कृपया इन्हें हतोत्साहित न करें... बल्कि, यदि आप उन्हें छुपा देख लें तो जानबूझकर वहीं से निकलें... इससे आपकी शर्ट ज़रूर ख़राब हो सकती है, पर जब उनकी इस शरारत का जबाब आप मुस्कुराहट से देंगे तो उनकी ख़ुशी आपको दुगुनी ख़ुशी वापिस करेगी... संग-संग, होली जिन्दा रहेगी... रंग जिन्दा रहेगा... उत्सव जिन्दा रहेगा... बचपन जिन्दा रहेगा... और, तभी हमसब जिंदाबाद रहेंगे !

जय हो...

©कुमार भूपेश