निजीकरण
साथियों केवल अपनी-अपनी समझ का फर्क है,वरना... निजीकरण का दूसरा नाम, गुलामी है।
निजीकरण का दूसरा नाम, भेद-भाव है, निजीकरण का दूसरा नाम, छुआ-छूत है।
निजीकरण का दूसरा नाम, ऊंच-नींच है, निजीकरण का दूसरा नाम, अछूतों को कुचलना है।
निजीकरण का दूसरा नाम, मूलनिवासी को असहाय बनाना है, निजीकरण का दूसरा नाम, बहुजनों को बेरोजगार करना है।
निजीकरण का दूसरा नाम, अछूतों को शिक्षा से वंचित करना है, निजीकरण का दुसरा नाम, अछूतों के अधिकार मारना है।
निजीकरण का दूसरा नाम, जनता का खून चूसना है, निजीकरण का दूसरा नाम, अशांति का माहौल बनाना है।
निजीकरण का दुसरा नाम , देश की संपत्ति बेचना है, निजीकरण का दूसरा नाम, देश पूँजीपतियों को सौंपना है।
निजीकरण का दूसरा नाम, अछूतों की बेटियों से बलात्कार करना है, निजीकरण का दूसरा नाम, अछूतों के घर जलाना है।
निजीकरण का दूसरा नाम, मनु स्मृति लागू करना है, निजीकरण का दूसरा नाम, संविधान को निरस्त करना है।
©#आदर्श मौर्य
