Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

माखनचोर

हे ! माखनचोर कन्हैया एक बार फिर आ जाओ।

तंग-गलियों में सिसकती राधिका को बचा जाओ।

हर चौबारों पर कंस खड़े देते हैं ये दंश बड़े ।

इतनी निकृष्ट कुकर्मों पर बेशर्म हँस रहे खड़े-खड़े ?

मानवता की लाश पड़ी हैं आकर इसे लिवा जाओ !

इतने निर्दय विधर्मी को रौद्र रूप दिखला जाओ !

प्यार की परिभाषा तुम आज ज़रा समझा जाओ।

तेरी यमुना मैली तब से स्वच्छता का पाठ पढ़ा जाओ।

©#कुमार