Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

आँखमिचौनी

हसरतें इतने पाल रखें हैं, तुमने आजमाने के ? हमने क्या टेंडर ले रखा हैं ? इन्हें निभाने के !

इनके तरकस में तो देखो, तीरे रंग-बेरंगे हैं ? हमने फिर भी कोशिश की हैं, इनके हर रंग सजाने के !

हर धड़कन पे नाम जपा, हर साँसों पे जिया तुम्हें ? फिर, तुमने ये जाल बिखेरी, क्यूँ...हमें भरमाने के ?

देख लिया हर ताना-पाई कैसे हो झाँकी भरपाई ? लो हमने भी हैं ठान रखी, अब इनसे नैन चुराने के !

©#कुमार