शरीर में आत्मा कहाँ रहती है ?
देहधारी जीव के ह्रदय की सीट पर आत्मा रहती है। जबतक ह्रदय गतिशील रहता है तब तक आत्मा देह में रहती है। हृदय की गति रुकते ही आत्मा उस शरीर से निकल जाती है।
ह्रदय की धड़कन को मापकर डॉक्टर गर्भ में पड़े बच्चे के जीवित होने का अनुमान लगाता है। अल्ट्रासॉउन्ड रिपोर्ट में भी हार्टबीट का माप दिया जाता है। हर्ट अटैक के बाद जीव मर जाता है। यानि जब तक ह्रदय गतिशील है तब तक आत्मा उस देह में रहती है।
हृदय में विराजमान आत्मा ही जीव के पुरे शरीर में अपने प्रभाव का विस्तार करती है। आत्मा की यह विद्युतधारा पुरे शरीर में न्यूरो सिस्टम के सहारे प्रवाहित होती रहती है। इसी विद्युतधारा से जीव का न्यूरोसिस्टम (तंत्रिका तंत्र ) कार्यशील होता है। न्यूरोसिस्टम से शरीर की सारी इन्द्रियाँ जुड़ी रहती है और कार्य करती है।
खून का लाल रक्त कण फेफड़ों में ऑक्सीजन ले जाते है। ये लाल रक्त कण आत्मा से ही शक्ति प्राप्त करते है। जब आत्मा शरीर से निकल जाती है तो शरीर में खून बनना बंद हो जाता है। खून बनने का कार्य ह्रदय करता है यह विज्ञान भी साबित करता है।
कार्यशील इन्द्रियाँ ही शरीर के अंगों का संचालन करती है। जब तक शरीर के अंग काम करते है। तब तक जीव जीवित रहता है। ऑर्गन फेल्यर होते ही बॉडी डेड हो जाती है।
इस प्रकार, आत्मा जीवन के उदगम का कारण और मृत्यु के कारण रूप में काम करती है।
© राहुल देवाशीष
