Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
16 Feb 2021·3 min read·

LAC और पैंगोंग झील

LAC का फुल फॉर्म Line of Actual Control है। यह भारत और चीन के बीच सीमा निर्धारित करता है। दुर्गम तथा पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण LAC पर कोई ठोस अवसंरचना का विकास नहीं हो पाया है। यानि भारत-पाकिस्तान, भारत-बांग्लादेश के जैसे काँटों के तार वाली सीमा LAC पर दृष्टिगोचर नहीं होती है।

LAC फिंगर-पॉइंट्स में बंटा हुआ है, जैसे-फिंगर-1 ,फिंगर-3 ,फिंगर-8 ,आदि-आदि। इसमें से कुछ फिंगर-पॉइंट्स पर भारती सेना का कब्ज़ा है तो कुछ पर चीन का। जहाँ जिस देश का कब्ज़ा है वहाँ उनके कैंप हैं , उनके बंकर आदि हैं।

अब बात करते है पैंगोंग झील की। यह झील LAC पर स्थित झील है। उपरोक्त फिंगर पॉइंट्स इसी झील के किनारे-किनारे है। जब भारत और चीन के बीच का 'हिन्दी-चीनी भाई-भाई' का सम्बन्ध टुटा और वे गोतिया(विपक्षी) हो गये तो जिसके दखल में जो क्षेत्र आया वे हो गये उनके फिंगर पॉइंट्स।

यह पैंगोंग झील भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा को ठीक उसी प्रकार निर्धारित करती है जिस प्रकार से कर्मनाशा नदी बिहार और उत्तरप्रदेश की सीमा रेखा को निर्धारित करती है। अंतर बस इतना है कर्मनाशा अन्तर्राज्यीय सीमा पर है और पैंगोंग अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर।

भौगोलिक दृष्टि से LAC का क्षेत्र शीत मरुभूमि है। यहाँ सूर्य का तेज प्रकाश है लेकिन उस प्रकाश में गर्मी नहीं है फलतः खेती-किसानी के लिए उपयुक्त तापमान नहीं है। हालाँकि पांगोंग जैसे झील में स्वच्छ पानी है, प्रदुषण रहित हवा है , परन्तु जमीन उपजाऊ नहीं है। पहाड़ी भूमि है, जिसमें बोल्डर पाये जाते है।अतः यहाँ खेती-बाड़ी नहीं होती।

आर्थिक रूप से यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ नहीं है। जैसा कि विदित है यहाँ खेती-बाड़ी नहीं होती परन्तु आधुनिक खोजों से इस क्षेत्र की मिट्टी में प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का पता चला है। यह खोज अब भी जारी है अतः भारत चीन यहाँ दिलचस्पी ले रहा है।

चूँकि LAC हिमालय पर्वत का हिस्सा है। और यह हिमालय पर्वत प्राचीन टेथिस सागर का अवशेष है। अतः इस क्षेत्र का 'किस्मत कनेक्शन' अवशेषी चट्टानों में पाए जाने वाले जीवाश्मों और सागर की तलहटी में पाये जाने वाले बेशकीमती खनिज-लवणों से भी जुड़ा है। इसलिए गब्बर और ठाकुर दोनों के नैन LAC के फिंगर पॉइंट्स पर टिके हुए है।

पर्यावरण और जैव-विविधता की दृष्टि से LAC का क्षेत्र कम प्रदुषण का है। शीत मरुस्थल के कारण यहाँ वनस्पतियां भी कम है। अतः जैव-विविधता भी कम पायी जाती है ।

मानव संसाधन की बात करें तो यहाँ के लोग पहाड़ी आबादी है अतः वे काफी कर्मठ और मेहनती होते है। शिक्षा और तकनीक के प्रचार-प्रसार से यहाँ की मानव-सम्पदा ने भी लाभ लिया है। वे भी आधुनिकता की तरफ अग्रसर होते जा रहे है।

कला और संस्कृति की दृष्टि से यह क्षेत्र बौद्ध धर्म बहुल क्षेत्र है। अन्य धर्म के लोग भी यहां पाए जाते है।

राजनीतिक दृष्टि से भी LAC सक्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। सैन्य गतिविधियों के कारण देश के हित-अहित और नफे-नुकसान को लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय दोनों प्रकार के दलों ने इस क्षेत्र पर राजनीति किया है। नेहरू-काल से लेकर वर्तमान सरकार ने अपनी-अपनी रोटियां LAC के ज्वलंत मुद्दों पर सेंकी है।

सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है। चीनी सेना और भारतीय सेना की गश्त यहाँ चलती रहती है। युद्ध स्तर की तैयारी दोनों सेनाओं की तरफ से यहाँ हमेशा रहती है।

इस प्रकार, हम पाते है कि LAC विभिन्न रूपों में अपने देश के लिये बेहद ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ पर होने वाली हलचलों पर हमें नज़र रखनी चाहिए। हम यहाँ से मीलों दूर हो सकते है। लेकिन यह हमारे देश का एक अहम् हिस्सा है। जिसकी कुशलता और अकुशलता दोनों का सीधा प्रभाव हमारे सुख-चैन पर है।

© राहुल देवाशीष