Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

मात्-पिता

हमारे जीवन के प्रत्येक मोड़ पर जो साथ रहे , वे होते हैं मात्-पिता। किस्मत भी छोड़ जाये पर जो न छोड़े साथ, उन्हें कहते हैं मात्-पिता॥

प्रेम,दया,करुणा,ममता,स्नेह जैसी, सद्‌भावना से युक्त हैं मात्-पिता। हमारी गलतियों को सहन करने वाले, सहिष्णुता से संयुक्त हैं मात्-पिता॥

दिल न कभी दुःखाना उनका, हमारे कुकृत्यों से रोते हैं मात्-पिता। रोकर भी जो शुभाशीष दे अपने बच्चों को, ऐसे होते हैं मात्-पिता॥

हमारे पारिस्थितिकीय दुर्व्यवहार को देख, उनका अवसान हैं मात्-पिता। सन्तान जब सफल बन जाये उनकी, तो जीते हैं शान से मात्-पिता॥

आगे बढ हम पर उठने वाले, हर सवालों का जवाब हैं मात्-पिता। हम तो एक कोरा कागज हैं साहब! जिनसे बनी किताब हैं मात्-पिता॥

हमें प्रत्येक विपन्नताओं से बचाया, हमारे लिये ऐसी ढाल हैं मात् -पिता। दुनियाँ में वो सबसे ज्यादा प्यार करते हैं जिनके हम लाल हैं मात्‌-पिता॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य