Siddharth Rana
Siddharth RanaCourseLiteraturePoetry
9 Feb 2021·2 min read·

गायत्री उपासना

कई घरों में यह देखने को मिला है कि वहाँ अनेकों देवी देवताओं की उपासना होती है परन्तु गायत्री उपासना नहीं। आखिर इसका क्या कारण है? गायत्री मंत्र आत्मकल्याण हेतु सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसके जप में हम उन सूर्य भगवान का ध्यान करते हैं जो इस सृष्टि के संचालक हैं। हमारा आत्मस्वरूप भी उनकी भांति है जिसके इर्द गिर्द हमारा जीवन घूमता रहता है।

जो मंत्र अपने आप से जुड़ने का प्रतीक है उसे ही न अपनाया जाए तो सद्बुद्धि कैसे मिलेगी। आज हमारे परिवार आत्मिक उत्कर्ष को इतना महत्व नहीं देते जितना भौतिक संपदा के एकत्रीकरण को। गायत्री उपासना हमारी सभी क्षुद्रताओं को भस्म कर देती है। जितने भी दोष दुर्गुण जो छिपे रहते हैं वे स्वतः ही हमारे जीवन उद्देश्य के अनुरूप हट जाते हैं।

हमें सूर्य की भांति होना है और किसी की भांति नहीं। हम सूर्यवंशी हैं तथा भारत में यदि आदिकाल से कोई उपासना प्रचलित है तो वह गायत्री उपासना ही है। क्योंकि जो जीवन लक्ष्य है उसके अनुरूप हम अपनी पात्रता को विकसित नहीं करना चाहते इसलिए ढेढ़ सारे देवी देवताओं के चक्कर में पड़े रहते हैं। गणेश जी विघ्न हटाते हैं, धन की व्यवस्था भी करते हैं परंतु वे अपनी जगह हैं।

जीवन देवता की साधना के लिए उस देवता से जुड़ना पड़ेगा जो सभी देवताओं का जनक है और वह स्वयं हम ही हैं। धन मिल जाए, स्वास्थ्य दुरुस्त रह जाए, यश फैल जाए परन्तु यदि विचार शुद्ध न हो पाएं तो यह सब व्यर्थ ही है। हम स्वयं चाहते हैं कि कभी कुछ गलत न सोचें, कुछ भी ऐसा न करें जो हमारे जीवन की गरिमा के अनुरूप न हो परन्तु हम बदल जाते हैं।

तमाम बदलाओं से गुजर भी जो श्रेष्ठता धूमिल न हो वह ही हम हैं तथा गायत्री मंत्र की साधना स्व से जुड़ने की साधना है। यदि सम्पूर्ण विश्व स्व से जुड़ने की ओर उन्मुख होता तो दुनिया स्वर्ग ही बन जाती ऐसे नर्क में न गिरी होती जो आज अपराध, बीमारी, नशाखोरी, आंतकवाद के रूप में दिख रहा है। शुरुवात हमारे परिवारों से होनी चाहिए।

© सिद्धार्थ राणा