Narendra Prasad Nirala
Narendra Prasad NiralaCourseLiteraturePoetry
25 Feb 2025·4 min read·

विवाह के दौरान वैदिक मंत्र के साथ खिलवाड़ नहीं

विवाह के दौरान वैदिक मंत्र के साथ खिलवाड़ नहीं: भारतीय संस्कृति की गरिमा

परिचय

भारतीय संस्कृति में विवाह एक पवित्र संस्कार माना जाता है, जो केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो आत्माओं का मिलन होता है। यह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान भी है। विवाह के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, जिनका गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। लेकिन वर्तमान समय में, कुछ लोग इस पवित्र अनुष्ठान के साथ खिलवाड़ करने लगे हैं, जैसे कि वैदिक मंत्रों के साथ मज़ाक करना, विवाह के दौरान डांस करना, शराब पीना और मांसाहार का सेवन करना। यह प्रवृत्तियाँ हमारी संस्कृति की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं।

वैदिक मंत्रों का महत्व

वैदिक मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि ऊर्जा और दिव्यता से परिपूर्ण होते हैं। इन मंत्रों का उच्चारण विवाह संस्कार के दौरान वर-वधू के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है और उनका विवाह सफल एवं सुखमय होता है। वैदिक मंत्रों का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

आध्यात्मिक शुद्धता - यह मंत्र वर-वधू को विवाह के पवित्र उद्देश्य का स्मरण कराते हैं।

दैवीय आशीर्वाद - इन मंत्रों के माध्यम से ईश्वर, देवताओं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सांस्कृतिक पहचान - वैदिक मंत्र भारतीय संस्कृति की गहराई और समृद्धता को दर्शाते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा - इनका उच्चारण एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है।

वैवाहिक समारोह में नृत्य (डांस) का बढ़ता प्रचलन

वर्तमान समय में शादियों में नाच-गाने और भव्य आयोजनों का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। नृत्य और संगीत स्वयं में आनंद के प्रतीक हैं, लेकिन विवाह के दौरान जब धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हों, तब इसका आयोजन अनुचित माना जाता है।

धार्मिक माहौल का उल्लंघन - जब विवाह मंडप में हवन और मंत्रोच्चारण चल रहे हों, तब डांस करना धार्मिकता के विपरीत हो जाता है।

ध्यान भटकाना - विवाह संस्कार ध्यान और एकाग्रता की माँग करता है, जबकि डांस और तेज़ संगीत ध्यान भंग करता है।

संस्कारों का अपमान - यह परंपरागत विवाह विधियों का अपमान माना जा सकता है।

विवाह में शराब पीने की कुप्रथा

आजकल शादियों में शराब परोसने का चलन बढ़ रहा है, जो न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों के भी विरुद्ध है। वैदिक विवाह संस्कार पवित्रता और शुद्धता पर आधारित होता है, लेकिन शराब का सेवन इस पवित्रता को दूषित कर देता है।

शारीरिक और मानसिक हानि - शराब पीने से व्यक्ति का विवेक नष्ट हो जाता है और वह अनुचित आचरण कर सकता है।

संस्कारों का ह्रास - भारतीय संस्कृति में शराब को तमोगुणी माना गया है, जिससे विकार उत्पन्न होते हैं।

विवाह की गरिमा का पतन - शराब पीकर लोग अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं, जिससे विवाह समारोह की पवित्रता भंग होती है।

विवाह में मांसाहार भोजन का परहेज़

विवाह भारतीय संस्कृति का एक पवित्र अवसर होता है, जिसमें सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लेकिन आजकल विवाह समारोहों में मांसाहार भोजन परोसने का प्रचलन बढ़ गया है।

धार्मिक दृष्टिकोण - विवाह संस्कार के दौरान हवन एवं मंत्रोच्चारण होते हैं, जिससे वातावरण में पवित्रता बनी रहती है। मांसाहार से यह पवित्रता नष्ट हो जाती है।

करुणा और अहिंसा का सिद्धांत - भारतीय संस्कृति अहिंसा पर आधारित है, और मांसाहार इस सिद्धांत के विपरीत है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव - वैज्ञानिक रूप से भी मांसाहार को कई बीमारियों का कारण माना गया है।

पारंपरिक मान्यताएँ - वैदिक और धार्मिक ग्रंथों में भी शुद्ध एवं सात्विक भोजन को ही श्रेष्ठ बताया गया है।

विवाह संस्कार को शुद्ध और पवित्र बनाए रखने के उपाय

विवाह को पवित्रता और शुद्धता के साथ संपन्न करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं:

वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण - विवाह में योग्य विद्वानों द्वारा मंत्रों का सही उच्चारण किया जाना चाहिए।

धार्मिक वातावरण बनाए रखना - विवाह मंडप में मंत्रों की महत्ता को समझते हुए अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

शराब और मांसाहार का त्याग - विवाह समारोह में पूर्णतः सात्विक भोजन और नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए।

डांस और तेज़ संगीत से बचाव - विवाह के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों में ध्यान भंग करने वाली गतिविधियों से बचना चाहिए।

संस्कारों का पालन - विवाह को केवल एक आयोजन न मानकर, इसे वैदिक विधि से संपन्न करना चाहिए।

निष्कर्ष

विवाह भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसे अत्यंत पवित्रता और धार्मिकता के साथ संपन्न किया जाना चाहिए। वैदिक मंत्रों के साथ खिलवाड़ करना, विवाह के दौरान नृत्य करना, शराब पीना और मांसाहार करना हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अपमान है। यदि हम अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं, तो हमें इन कुरीतियों से दूर रहकर अपने विवाह को एक आध्यात्मिक और संस्कारित रूप में संपन्न करना चाहिए। इस प्रकार, विवाह न केवल एक व्यक्तिगत खुशी का अवसर होगा, बल्कि हमारी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा का भी माध्यम बनेगा।

©योगाचार्य नरेन्द्र प्रसाद निराला