Mausham Jayaswal
Mausham JayaswalCourseLiteraturePoetry
12 Feb 2022·3 min read·

प्रेम और बेवफाई की परतों को टटोलती दीपिका स्टारर "गहराइयां"

दीपिका पादुकोण और सिद्धांत चतुर्वेदी स्टारर फिल्म गहराइयां का ये गाना "तू मर्ज है दवा भी, पर आदत है हमें" को पूरे फिल्म का अगर म्यूजिकल निचोड़ कहे तो कुछ गलत नहीं होगा। वेलेंटाइंस वीक के बीच ये फिल्म अमेजन प्राइम पर रिलीज हुई है। जिसकी कहानी प्रेम के समंदर में दर्द, भरोसे, झूठ, धोखे और टूटते-बनते रिश्तों के भंवर में हिचकोले खाती हुई आगे बढ़ती है।

प्रेम और बेवफाई की परतों को टटोलती कहानी हिंदी फिल्मों के लिए कोई नया विषय नहीं है। कॉमेडी, ड्रामा, और मिस्ट्री-थ्रिलर के साथ बॉलीवुड में पहले भी ऐसे विषय को परोसा जा चुका है। लेकिन निर्देशक शकुन बत्रा की 'गहराइयां' जिस स्वाभाविकता और परिपक्वता के साथ प्रेम और उसकी बुनियाद पर बने रिश्ते को पेश करती है, वो इसे इस श्रेणी की दूसरी फिल्मों से अलग करती है। आज की नई पीढ़ी जितनी कूल दिखती है भीतर से उतनी ही बेचैन भी है। खासतौर से रिश्तों की बेचैनी इनके बीच साफ तौर से देखी जा सकती है। जिसमें सुकून की तलाश में वो न सिर्फ जल्दबाजी दिखाते हैं बल्कि इसी जल्दबाजी में वो कई असफल प्रेम और उससे होने वाले तनाव की गिरफ्त में भी आ जाते हैं।

सरसरी तौर पर ये फिल्म रोमांस और रिश्तों से उलझती हुई एक लव ट्राएंगल फिल्म लग सकती है। लेकिन फिल्म के नाम की तरह इसके संवाद और दृश्यों की गहराई में उतरने पर ये फिल्म शहरी पृष्ठभूमि वाले नई पीढ़ी की कहानी बयां करती है। फिल्म अपने ट्रेलर और गानों में दिखाए गए बोल्ड सीन्स की वजह से रिलीज के पहले खूब चर्चाओं में रही थी। लेकिन असल में फिल्म की कहानी इसके ठीक उलट है। जिसे समझने के लिए आपको फिल्म की मुख्य कलाकार अलीशा (दीपिका पादुकोण), मिस्टर खन्ना (दीपिका के पिता, नसीरुद्दीन शाह), जैन (सिद्धांत चतुर्वेदी), टिया (अनन्या पांडे), और करण (धैर्य करवा) के किरदार को ना सिर्फ बारीकी से देखना पड़ेगा बल्कि उनके अतीत और वर्तमान के बीच चल रहे द्वंद की गहराइयों गोता लगाना पड़ेगा। खासतौर से दीपिका ने अपने किरदार अलीशा के भीतर चलने वाले बवंडर, उसके दर्द, उसकी उलझनों को जिस सच्चाई से उभारा है। वो इस फिल्म में एक नई जान फूंकती है। इन किरदारों के बीच रिश्तों के धागे कुछ इस क़दर उलझे हुए हैं की रिश्तों की ये पेचिदगियां इन किरदारों के वर्तमान का रुख मोड़ने लगती है।

इस फिल्म के लिए पहली बार इंटीमेट डायरेक्टर भी रखा गया था। जिसका काम काबिल-ए-तारीफ है। क्योंकि फिल्म में जो इंटीमेट सीन्स हैं वो अश्लील के बजाय लव मेकिंग ज्यादा लगते हैं। निर्देशक शकुन बत्रा इससे पहले ‘कपूर एंड सन्स’ और 'एक मैं और एक तू' जैसी रिश्तों पर आधारित फिल्में बना चुके हैं। पर शकुन अपनी इस फिल्म में कुछ अलग ढंग से किरदारों को पेश कर रहे हैं। जिसके टारगेट ऑडियंस शहरी युवा हैं। इस फिल्म की एक बड़ी यूएसपी इसका म्यूजिक है। "डूबे.. डूबे" और "उफ्फ ये गहराइयां" गाना पहले ही लोगों के प्लेलिस्ट का हिस्सा बन चुके हैं।

फिल्म के लेखकों ने इस तरह से फिल्म के किरदारों को गढ़ा है की फिल्म अचानक से गियर बदलकर रिलेशनशिप ड्रामा से थ्रिलर में बदल जाती है। जिसमें सिद्धांत के किरदार की बात करें तो वो जिस तरह से मोड़ लेता है, वो थोड़ा अजीब लगता है। यहां लगता है की फिल्म को क्लाइमेक्स तक जल्दबाजी में पहुंचा दिया गया है। सिद्धांत के किरदार पर थोड़ी और मेहनत की जाती तो फिल्म और बेहतर नजर आती। आख़िर में अगर आप गंभीर फिल्मों के शौकीन हैं तो शायद ये फिल्म आपको निराश करें। पर ये फिल्म शहरी युवाओं जो की इस फिल्म की टारगेट ऑडियंस भी है उनको पसंद आएगी।

फिल्म:- गहराइयां कलाकार:- दीपिका पादुकोण, सिद्धांत चतुर्वेदी, अनन्या पांडे, धैर्य करवा डायरेक्टर:- शकुन बत्रा,  प्लेटफॉर्म: एमजॉन प्राइम वीडियो।