Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·1·

दिनचर्या

दिनचर्या कैसी हो, इसमें छिपा है राज स्वास्थय के। मै बतलाता बस, जो मैंने महसूस किया। जियो जिन्दगी सहजता से, यही जिन्दगी तो मस्ती की।

जीने की नियम कड़ें नहीं, उतार सकते अपने जीवन में। शरीर के मुख्य है तीन प्रकार - स्थूल, मानसिक एवम् आत्मिक। तीनो है जुड़े ऐसे, एक दूसरे से, एक दूजे पर करते असर।

समझे ऐसे, शरीर है एक गाड़ी बस। चलती तभी, सब कल पुर्जे करे कार्य सब ठीक से। इसके परे भी, मन एवम् आत्मा का भी है मुख्य स्थान।

शरीर, मन एवम् आत्मा को स्वास्थ्य रखकर ही, हम रह सकते स्वास्थ्य। चले मै राज खोलता एक एक कर, कैसे रह सकते हम स्वास्थ्य। मै बतलाता बस, जो मैने महसूस किया। सुबह उठकर सबसे पहले ईश करो ध्यान, मंत्र का करे उच्चारण।

मंत्र भी एक संद्रित ऊर्जा है, जो स्पंदित करती अचेतन को। नब्बे से अधिक भाग, तो मानव के होते अचेतन में। अचेतन को चेतन करना, ही तो भग्य का निर्माण है। मंत्र शक्ति से चले, भग्या का निर्माण करे।

यही तो प्रकृति की नियम, जो जैसा हम चाहते। सारी कायनात लग जाती, उसे पूरा करने में। मै बतलाता हूं, जिसको मैंने जिया।

जब नींद एवम् जागने की बीच की अवस्था हो। लो मृतुन्जय मंत्र 11 बार, स्वास्थय लाभ को पाए। लो गायत्री मंत्र 11 बार, श्रेष्ठ बुद्धि की पराकाष्ठा हो। लो दुर्गा के 32 नाम, 3 बार, सारे दुर्गती जीवन का विसर्जन करे।

मंत्र योग ऐसे शक्ति, मन की चेष्टा बदलने की ताकत है। अच्छे बुरे सब जानते सभी, पर करते यही जो उसके संस्कार बीज है। मंत्र संस्कार को बदलने की शक्ति है, मंत्र की महत्ता को समझे।

फिर शारीरिक क्रिया से निवृत होकर, स्वाध्याय करे। सूर्य की किरण का पान करे, कुछ समय लालिमा पर टक टकी किया करे। कुछ देर सही, बिना आह्म के चला करे, पंचभूत से जुड़ने की कोशिश करें ।

कुछ देर मत्ती, जल, पानी, हवा से संपर्क में रहे, स्वस्थ्य रहे। पांच भूत जुड़े है, त्रिगुणा, त्रिदोष के राज सभी। सभी के संतुलन में, स्वास्थ्य के राज छिपे सब।

ले जलपान अपनी इच्छा से, ले सुपाच्य कच्चे सब्जी एवम् फल पहले पहर में। चाय की त्याग करे सभी, प्राकृतिक चीजों को अपनाए। दूसरे पहर ही ले एक संतुलन भोजन, इसका हम पान करे।

आसान, प्राणायम या कोई भी योग की अवस्था को अपनाए। किसी भी एक आसान की सिद्धि करे, एक आसान है काफी। एक कि अवस्था में लगातार स्थिर रहना ही आसान है।

रात का भोजन ले बहुत हल्का का ही, नित दिन समय से सोए। जीवन में सभी कर्म करे ऐसे, जीवन स्वर्ग बन जाए। प्राणायम हम सभी करे, ध्यान स्वतः लग जाए।

दिनचर्या कैसी हो, इसमें छिपा है राज स्वास्थय के। मै बतलाता बस, जो मैंने महसूस किया। जियो जिन्दगी सहजता से, यही जिन्दगी तो मस्ती की।

जिंदगी को इतना ही जीये, जो जीवन की मांग हो बिल्कुल सहज एवम् बिना शर्त जिए इस जीवन को। ऐसे जीवन की ना कोई दिनचर्या है, बस जिए जो जीवन कहती है।

बस सुन तू आवाज आत्मा की, वहीं मार्ग तो उत्तम है। जोड़ जबरस्ती ना करे, बस तू रम जा जिन्दगी के खेल में। जिए बस इतना, जिन्दगी छूटने का ऐहसास आवश्य रहे।

भोजन करे वहीं जो, मूल रूप में पाई जाए इस धरा पे। स्वादिष्ट हो अपने मूल रूप में, हर मानव के अलग मापदंड। सब बदल जाते नियम, जैसे ही बदलते संयोग त्रिदोषों का।

आत्मा की आवाज सुने, उत्तारे इसे अपनी जीवन में। नित व्यायाम, ध्यान, स्वाध्याय, अच्छे खानपान ही, स्वास्थ्य करे मानव को। प्राकृतिक के साथ जीना ही, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु बनाता हमे।

आधुनिक की दौर में, हम दूर होते गए प्रकृति से। स्वस्थ्य तभी संभव है, रहे जब हम प्रकृति की मूल अवस्था मै। यह अभी भी संभव है, 24 घंटे के 24 मिनट स्वयं के लिए जिए।

सही मात्रा एवम् सही समय पर, पानी एवम् भोजन ग्रहण करे। शरीर की क्षारीय को बढ़ाकर एवम् अम्लीयता को संतुलित करे। दवा को जीवन से हटा कर, प्राकृति के नियम को जिए।

पांच तत्व की शुद्धि ही, तो शरीर के स्वास्थय के राज खोलते। प्रकृति के पांच तत्वों के साथ जिए, शुद्धता का पालन करे। स्वस्थ्य स्वतः प्रक्रिया है, शरीर अपना ही डॉक्टर है।

इलाज करता खुद ही, छोड़ इस जीवन को प्रकृति की गोद में। ये जीवन ही योगमय हैं, यही है मेरा अनुभव स्वस्थ्य के। मै बतलाता बस, जो मैंने महसूस किया।

#दिनचर्या

©#मिथिलेश कुमार