Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
22 Mar 2021·1 min read·

बिहार

मैं गौतम के शांति सम्प्रेषण हूँ । मैं चाणक्य का अमिट प्रण हूँ । मैं चन्द्रगुप्त का समर्पण हूँ । मैं आर्यभट्ट का अन्वेषण हूँ । मैं बुढे सिंह का रण हूँ । मैं नागार्जुन का साहित्य वर्णन हूँ । मैं जनतंत्र का प्रथम उदय हूँ । मैं तमस पर प्रकाश विजय हूँ । मैं विश्वविजयी का करता पराजय हूँ । मैं स्वर्णिम इतिहास लिए सदा अजय हूँ । मैं विश्वामित्र की तपोभूमि हूँ । मैं वेदों में वर्णित जमीं हूँ । मैं गाँधी का कर्मभूमि हूँ । मैं तलवारों की झंकार हूँ । मैं नालंदा, विक्रमशिला का ज्ञान विस्तार हूँ । मैं दिनकर की हूंकार हूँ । मैं प्रसाद (राजेन्द्र प्रसाद) का राजनीतिक प्रसार हूँ । मैं बिस्मिल्ला के शहनाई की धून हूँ । मैं दशरथ मांझि का जूनून हूँ । देखकर जुल्मों सितम जो खौल उठे ,मैं वह खून हूँ । मैं ज्ञान का प्रथम जयघोष हूँ । मैं जन जन में पल्लवित करता जोश हूँ । मैं सत्य,साहस, सद्भाव, संयम, सद्ज्ञान,सामर्थ्य,संघर्ष,समर्पण ,सेवा ,संस्कृति ,शौर्य,शालीनता, शान्ति का उदघोष हूँ । मैं राष्ट्र का सिरमौर हूँ । यह समझने की नादानी न करना कि मैं कमजोर हूँ । मैं स्वयं के भुजदंडों पर बदलता दौर हूँ । मैं बिहार धरा का ताज हूँ । मैं आर्यावर्त का नाज हूँ । मैं जन-जन का आवाज हूँ ।

आप सबको बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।

©सतीश कुमार पांडेय