Ratnasen Bharti
Ratnasen BhartiCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

अपना गांव अपना घऱ

चलो दरख्तों से मिल आए हम चलो अपने घऱ हो आए हम

जड़ों से मिला है उन्हें खनिज पानी चलों मिट्टी हो जाए हम

मां की रसोई की खुशबु अब शहरों में कहां चलों मिट्टी की सौंधी खुशबु ले आएं हम चलों दरख्तों मिल आए हम।