Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

बारिश

बारिश के झरोखे आती है, भिंगा जाती सभी को। सूखी बगिया खिल उठते है, मौसम ठंडा जाता। मौसम खुशनुमा है, मन गदगद हो रहा है।

वारिश के महीने समाप्त होने को है, धान गर्भा रही। ये हल्की समय समय पर वर्षा, जीवन दान दे रही है। सभी कलियां मुस्करा रही, चारो ओर हरियाली ही हरियाली है।

किसानों के वांछे खिल जाते है, जब वारिश अपनी मौजदूगी देती। लोगो को खुशियां देख, मन गद गद हो गया है। इन्द्र देवता की कृपा बनी रहे, हम सब पर।

हमलोग की किसानी बढ़ती रहे, कृषि उत्पादों का सही मूल्य मिले। आय बढ़े, सुधरे जीवन स्तर लोगो की। यही एक आशा है, शुद्ध धन उपार्जन की।

वारिश की झरोखे आती रहे, खुशियां परोसते रहे सबकी थाली में। घर घर खुशहाली आये, सबकी आंखों में आशा के दीप सजे। सबके सपने पूरे हो, ऐसी हमारी समृद्धि आये।

सभी मस्त एवम् तंदरुस्त रहे, मन गदगद हो रहा है। मेरी आंखे दूर दूर तक जाती, कुछ खोज रही जैसे। कोई भूखा ना हो, दुखी ना हो, वारिश की बूंदे मानो, जीवन दान दे रही लोगो को।

वारिश के झरोखे आती है, भिंगा जाती सभी को। सूखी बगिया खिल जाती है, मौसम ठंडा जाता। मौसम खुशनुमा है, मन गदगद हो रहा है।

#किसान

©#मिथिलेश कुमार