Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

जिन्दगी अभी बाकी है

शब्दों में जिंदा रहने की जहदो जहद ना कर, लव अभी बाकी है।

अलविदा होकर भी, जिन्दगी अभी बाकी है। कुछ कर ऐसा, फक्र करे दुनिया सारी।

भगवान भर दे, ऐसी नई ऊर्जा समर्थ से हममें। झोली खाली ना हो, कोई खाली ना जाए। दे उड़ान ऐसी, असमा फक्र करे।

ना हो कोई भेद भाव, समरसता का विस्तार हो। चले क्यों न रेत के टीले बनाए।

रेत की टीले ही अच्छे होते है, उन दीवारो से जो बन गयी, कभी धर्म, लिंग, जात-पात, उच्च नीच के भेदभावों से।

चले मिटाये, फिर से रेत के टीले बनाये। रेत बनाती है, दीवारे बांटती है।

©#मिथिलेश कुमार