Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

स्वर्णिम चतर्भुज सड़क

मन गदगद है, अच्छी सड़क ने घटा दी है दूरी। बिल्कुल मस्ती की ड्राइव, सांय-सांय जाती वाहनों। हल्की सनसनाहट कभी-कभी, थरथराहट कभी-कभी।

सरपट दौड़ती मेरी, दो पहिया फटफटिया। दौरी जा रही है, सांय-सांय सी। हल्का सा प्रतीत, सपनों की उड़ान जैसा।

सड़क चौड़ी है, छाती पर दौड़ लगा रहा हूं। उछल रही, सपनों की उड़ान की ओर। ये करिश्मा है, स्वर्णिम चतर्भुज सड़क की।

याद आ रही, उन महान राजनेता का। जिन्होने इसकी नींव रखी, बनवाया चमकाया। भारत रत्न अटल जी की याद ताजा हो गई।

मन गदगद है, अच्छी सड़क घटा दी दूरी को। बिल्कुल मस्ती की ड्राइव, सांय-सांय जाती वाहनों। नए भारत का आगाज, निर्माण एवम् आत्मनिर्भरता की ओर।

सड़के जोड़ रही है, संबंधों को। विकसित भारत की पहचान है, ये सड़के। अब हमारी शान है, सरपट दौड़ने वाली सड़कें। प्रेरित कर रही, सपने की उड़ान छूने को मन गदगद है, अच्छी सड़क घटा दी दूरी को।

#एनएच2 #आधुनिक #भारत

©#मिथिलेश कुमार