Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

पौधे का घर

पौधे का घर के पास खड़े, ले रहा आश्रय। धूप की तीक्ष्ण किरण, पड़े ना कोमल पत्तियों पर। हर मां बाप की आशा ऐसी, बच्चावा रहें सदा खुश। आए ना उसके जीवन में, कोई ऐसे तूफान।

छतरी बन छाया दू, रहे ना कोई दुख। ऐसे ही मां बाप की वेदना, बच्चावा रहें सदा खुश। चल हम भी मां बाप बन, करे पर्यावरण का पोषण। मां बाप बन पर्यावरण भी, जैसे देती हर जीवन को धूप। हर पत्तियों को धूप मिले, सभी रहे खुशहाल।

हर पौधे के घर हो, दो उनको संरक्षण। कोई भी धूप ना उसे डिगा सके, रहे खड़ा हर वक़्त। पौधे का घर के पास खड़े, ले रहा आश्रय। धूप की तीक्ष्ण किरण, पड़े ना कोमल पत्तियों पर।

#environment

©#मिथिलेश कुमार