Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

कोई छूट रहा है

सांस ठहर सी गई, कोई छूट रहा है।  / याद आती है, वो खुशनुमा पल। / उन दिनों की,एक लम्हा छूट रहा है।

साथ-साथ थे एक कमरे, एक दिन।  / याद आ रही है, वो दिन खुमार के। / साथ बैठे, खत्म ना होने वाले वो पल।

वो बोधगया के दर्शन, घेर बैठे गोलाकार। / बौद्घिक वार्तालाप के दिन वो, याद आ रही है। / फंतुशिया की सैर सपाटे, कुछ पल साथ के। / कितने सुहाने थे वो दिन, कोई छुट रहा है।

मलाल नहीं, कोई छूट गए या रूठ गए। / दोस्ती कायम रहे, जिंदादिली जिंदा रहे हमेशा। / जो चल ना सका मलाल नहीं,मै बस चलता हूँ।

आबाद रहे तेरी बगिया, सभी खुशहाल रहे। / हम साथ रहे या ना रहे, साथ रहेगी वो यादे। / दोस्तों साथ रह ना सका तो क्या, ख्वाबों में साथ रहूँगा।

मत घबरा तू चलता जा, हमारा साथ रहेगा। / दोस्ती प्रगाढ़ होगी, अगर साथ ना हो हमारा। / संसार का खेल ऐसा, कितने छूटते, बिछड़ते। / यादों में साथ रहूंगा, जन्नत में साथ रहेगा।

साथ छूट रही जैसे, लम्हा रुक सा गया है। / मत घबरा, मेरा साथ रहेगा / जन्नत की सारी चीज, फिदा हो तुमपे। / सांस ठहर सी गई, कोई छूट रहा है।

©#मिथिलेश कुमार