Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·

रामायण में आधुनिक समस्याओं का समाधान

रामायण:दो शब्द

दोस्तो,रामायण पढ़कर आप अपनी अकैडमिक(Academic) एक्जाम को पास नहीं कर पाएंगे इस बात को आप भी जानते है और मैं भी।आपमें से बहुत को लग सकता है कि इसे बाद में पढ़ लेंगे और जान लेंगे।अभी मेरी लाईफ में रामायण कि क्या जरूरत है?अभी तो मेरी पढ़ाई है,जॉब लेना है,बिजनेस ग्रो कर रहा है,प्रोजेक्ट का लोड है,घर में कुछ डिस्टर्ब चल रहा है,फ्रेंडस है,मजे ले रहा हूँ,इत्यादि-इत्यादि।

मैं आपसे एक पर्सनल सवाल पूछता हूँ क्या आप अपने आप को,अपनी फैमिली को और अपने रिलेशनशिप को ठीक से मैनेज कर पा रहे है?अगर आप नशा करते हो तो क्या आपको सच में मजा मिलता है या अब आपकी मजबूरी हो गयी है कि बिना पिये हुए नींद नहीं आती?क्या आपको अपने गुस्से पर,अपने सेक्सुअल हैबिट्स पर,इत्यादि पर कंट्रोल है?

रामायण में इन सारी चीजों के उपाय लिखे हुए है।जिन समस्यायों को आप किताबी ज्ञान से और रिसर्च लैबोरेटरी के प्रयोग से नहीं सुलझा सकते पा रहे है और जिनसे तबाह होकर लोग सुसाईड किये जा रहे है,डाइवोर्स हो रहे है,ब्रेकअप हो रहे है,फैमिली सेपरेट हो रही है,इन सब समस्याओं का समाधान इस महाग्रंथ में है।आप जिस भी समस्या से जूझ रहे है,उस तरह कि समस्या का जिक्र और उसके समाधान रामायण में है।

आज मैं रामायण का परिचय दे रहा हूँ।अपने अगले लेख से रामायण के गर्भ में हमलोग प्रवेश करेंगे।

रामायण:एक परिचय

रामायण का मूल नाम 'पौलस्त्यवध'(Paulatsyavadh*)काव्य यानि 'रावणवध' काव्य है। पुलस्त्य ऋषि के वंश में जन्म लेने के कारण रावण को पौलस्त्य कहा जाता था।यह नाम महर्षि वाल्मीकि ने ही दिया था।रामायण को लिखने के उपरांत उसे सबसे पहले वाल्मीकि जी ने श्रीराम के बेटे लव और कुश को सुनाया था।लव और कुश ने रामायण के श्लोकों को राम दरबार में चारों भाइयों-राम,लक्ष्मण,भरत और शत्रुघन के समक्ष गाया।उनका गायन और प्रदर्शन इतना जबर्दस्त था कि बाद में यह रामदरबार से निकलकर समाज में आ गाया और घरों में और समारोहों में गाया जाने लगा और यह रामरस गाथा लोकप्रिय हो गयी।इक्ष्वाकू वंश में इस गाथा का नाम 'रामायण' पड़ गया।

रामायण के 24000(चौबीस हजार) श्लोक ,500 अध्याय और,सात* भागों(बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किसकीनधा *काण्ड,सुंदरकाण्ड, लंकाकाण्ड और उत्तरकाण्ड ) में संकलित है।महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रामायण की रचना के पूर्व इसकी घटनाएँ लोककथाओं के रूप में भारतीय समाज में प्रचलित था।

महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रामायण का पहला प्रिंट कब हुआ इसका कोई निश्चित तारीख पता नहीं चल पाया है।उस समय प्रिंटिंग प्रेस नहीं था और न ही कॉपीराइट का ऑफिस ही। विद्वानों का मानना है कि 5वीं ईसा पूर्व से 1वीं ईसा पूर्व के बीच इस महाग्रंथ की रचना हुई होगी।यह बात सही भी मालूम होती है क्योंकि 6वीं ईसा पूर्व के आसपास महर्षि पाणिनी ने संस्कृत व्याकरण(अष्टाध्यायी) की रचना की थी।इस संस्कृत व्याकरण के अनुशासन का पालन रामायण को लिखने में किया गया है।

गौरतलब है कि आधुनिक शोध में महर्षि पाणिनी की तुलना कम्प्युटर के जनक 'अलान ट्यूरिंग(Alan Turing)' से की गयी है।भारतीय लोग कम्प्युटर के जनक पाणिनी को ही मानते है।जिस लॉजिक का प्रयोग अलान ट्यूरिंग ने डिजिटल सिग्नल के प्रणालीबद्ध तरीके से संचालन के सहारे इनपुटप्रोसेसआउटपुट आधारित कम्प्युटर डिज़ाइन करने में किया है ठीक उसी लॉजिक का प्रयोग पाणिनी ने संस्कृत स्वरों के सहारे मन की शांति और शक्ति अर्जन के लिये मंत्र को डिज़ाइन करने में किया था।पाणिनी जी फोनेटिक्स(स्वर विज्ञान) के एक्सपर्ट थे।

मूल रामायण संस्कृत भाषा में है। बाद में व्याख्याकारों ने अलग-अलग भाषाओं में इस महाग्रंथ का भाष्य किया है।मैंने अपने साथ रामायण का मूल ग्रंथ और विद्वानों के भाष्य दोनों रखे है।इन दोनों की मदद से और अभी तक के शोध तथा तकनीकी विकास एवं बदलते सामाजिक परिपेक्ष्य के अनुरूप मैं रामायण की वैसी गाथाओं को आपके समक्ष पेश करूंगा जिससे आपको बोरियत भी नहीं होंगी और पूरा रामायण का ज्ञान आप प्राप्त कर लेंगे।