Siddharth Rana
Siddharth RanaCourseLiteraturePoetry
9 Feb 2021·1 min read·

योग का महत्व

योग के हम विद्यार्थी हैं तथा योग जीवन जीने की कला है। कला में स्वतंत्रता होती है। कई बार योग ग्रंथों में लिखी बातें कुंठा पैदा करती हैं। हम दर्शन को तो स्वीकार करते हैं पर स्वयं जो हैं उसे स्वीकार नहीं करते।

यही धर्म और अध्यात्म में भिन्नता है। धर्म एक है परन्तु अध्यात्म प्रत्येक व्यक्ति के अनुसार अलग होता है। हम अपना विस्तार ही तो चाहते हैं पर वह शायद किसी पुस्तक में न हो हमारे ही पास हो। मुक्ति संसार से नहीं हमें अपने उस हिस्से से चाहिए जो कहता है कि तू सीमित है।

इसलिए जब हम योग के पथिक हैं तो अपने को विस्तार दें। अपने से पूछें कि क्या कुछ हमें ऐसा मिला है जिसे उजागर कर हम अपना तथा सभी का जीवन सुंदर बना सकते हैं। जीवन तो सुंदर ही है परन्तु अपनी मान्यताएं सुंदरता को देखने नहीं देती।

ऐसा क्या होना चाहिए कि हम ब्रह्म की बात करें और एक तरफ हमारे जीवन में अशांति हो, अपूर्णता, असत्य हो। हम यदि योग से जुड़ अपनी प्रतिभाओं को निखार सकें जो कुछ भी हो सकती हैं तो योग हमें वह देगा जो हमें चाहिए। और यदि ब्रह्म के बारे में कितना भी पढ़ लें तो न ही ब्रह्म मिलेगा और न अपने को पाएंगे।

© सिद्धार्थ राणा