Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

रामायण महाकाव्य-वर्तमान में कितना प्रासंगिक?

अपने आलोचकों की अपमानजनक प्रतिक्रिया के बावजूद मैंने रामायण विश्लेषण अभियान(RAMAYANA ANALYSIS MISSION) प्रोजेक्ट यानि RAM Project पर  अपना काम जारी रखने का निर्णय लिया है।मेरे प्रिय आलोचकों को तकलीफ इस बात से है कि मैं इस ऑफ टॉपिक(Off Topic) पर लिखकर लोगों का समय बर्बाद कर रहा हूँ।आलोचना में जो तर्क दिया गया है वह बहुत ही कमजोर है।

ऐसा मैं इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि जिस चीज की अहमियत का  हमें पता नहीं होता वह हमें बकवास ही लगता है।द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ती के बाद जब विजयी सेना अफ्रीका छोड़कर जाने लगी तो वहाँ के कुछ गोदाम में उन्हें कोकोआ(Coco) का एक बड़ा-बड़ा ढेर दिखाई दिया।उन्हें उस समय पता नहीं था कि कोकोआआर्थिक रूप से बहुत ही उपयोगी वस्तु है।कोकोआ से चोकोलेट,ड्रिंक्स,आदि बनाये जा सकते है,करोड़ों कमाए जा सकते है,इस बात का उन्हे ज्ञान नहीं था।फलतः वे उन गोदाम में आग लगाकर ,कोकोआ को जलाकर चले गए।

इसी तरह भारत का महाकाव्य रामायण भी मूल्यहीन प्रतीत होता है।सामान्य सी घटना घटी थी।एक राम नाम का व्यक्ति आया था ,उसकी वाईफ को एक राक्षस ने किडनैप करके ले गया था,उसे पता चला,उसने उस किडनेपर राक्षस से युद्ध किया उसमें जीता,अपनी बीवी को वापस लिया और पोपुलर हो गया बाहुबली कि तरह।

दोस्तों अगर रामायण इतनी छोटी बात होती तो महान लेखक अदरणीय वाल्मीकि जी को 6 भाग में ,500 अध्याय में और 24000(चौबीस हजार) श्लोक में राम की महिमा लिखने की आवश्यकता नहीं थी।पूरी दुनियाँ में कौन से ऐसे व्यक्ति हुए है जिनके लाईफ की और उनके कामों की इतनी विशाल बायोग्राफी लिखी गयी है मुझे कृपया करके आप बताएं,इस लेख के कमेंट बॉक्स में लिखकर।

अपने भारतीय एवं गैर-भारतीय प्रशंसकों से मैं कहना चाहूँगा कि मैं एक नये नजरिए से रामायण को सरल भाषा ,व्यावहारिक उदाहरण और आधुनिक तर्क के जरिये आपके समक्ष प्रस्तुत करूंगा।मेरी कोशिश रहेगी कि मैं क्रमबद्ध रूप से एक-एक कर वैसी स्टोरी ही आपके लिए लेकर लाऊँ जो आज के व्यक्तिगत,सामाजिक,राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में प्रासंगिक है।