मैं बिहार हूँ
अंगिका, मैथिली, मगही, भोजपुरी का सार हूँ । मैं ही गुरु गोविंद का तलवार हूँ । विक्रमशिला का खंडहर और रेशम का संसार हूँ । मैं ही क्षीरसागर के समुद्र-मंथन का मंदार हूँ । मैं बिहार हूँ...
तिलका मांझी का तीर भी मैं और दशरथ मांझी का पीर हूँ । समझने वाले समझ सको तो बूढ़े कुंवर सा वीर हूँ । शेरशाह का बल और अशोक का धम्म हूँ । विश्व के पहले गणराज्य वैशाली का स्तंभ हूँ । मैं बिहार हूँ...
कर्ण का 'अंग' और 'मगध' का चंद्रगुप्त महान हूँ । महावीर से बुद्ध तक सबका मैं पहचान हूँ । रेणु का "मैला आँचल" और देवकीनंदन का "चंद्रकांता" हूँ । मैं ही भिखारी ठाकुर के "बिदेशिया" का संवाद हूँ । मैं बिहार हूँ...
विद्यापति के "पदावली" से "बेनीपुरी" का "आम्रपाली" हूँ । गोपाल की "रागिनी" से नागार्जुन का "युगधारा" हूँ । चाणक्या का अर्थशास्त्र और नालंदा का सूत्रधार हूँ । आर्यभट्ट का शून्य और तथागत अवतार हूँ । मैं बिहार हूँ...
राजेन्द्र बाबू का तेज और बिस्मिल्लाह का तान हूँ । माँ भारती का सारथी और सारा हिन्दुस्तान हूँ । जयप्रकाश का शंखनाद और दिनकर का हुंकार हूँ । उगता सूरज दुनियां पूजे मैं डूबते का भी हकदार हूँ । मैं बिहार हूँ... हां मैं बिहार हूँ...!
©#कुमार
