Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
7 Jan 2023·1 min read·

श्रीमदभागवतम 1.1.1: कृष्ण का परिचय

स्कंध-1,अध्याय-1, श्लोक-1: कृष्ण का परिचय ------------------------------- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञ: स्वराट् तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत्सूरय: । तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि ॥ १ ॥ ------------------------------- वसुदेव-देवकी पुत्र वासुदेव कृष्ण को प्रणाम करके श्रील व्यासदेव श्रीमदभागवत महापुराण की रचना प्रारम्भ करते है। पहले श्लोक में वे कृष्ण का परिचय देते है। कृष्ण सृष्टि की उत्पत्ति, पालन एवं संहार के कारण है।

कृष्ण प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सृष्टि के सभी गतिविधियों से अवगत रहते है । कृष्ण स्वराट यानि पूर्ण स्वतंत्र है। वे किसी के अधीन नहीं है,उनपर किसी का नियंत्रण नहीं है।

कृष्ण ने ही सबसे पहले सृष्टि के आदि जीव ब्रह्मा के हृदय में वैदिक ज्ञान प्रदान किया था। कृष्ण के कारण ही बड़े-बड़े मुनि तथा देवता मोह में पड़ जाते है जिस प्रकार आग में जल और जल में स्थल देखकर कोई माया द्वारा मोहग्रस्त हो जाता है।

उन्हीं के कारण यह भौतिक ब्रह्मांड जो प्रकृति के तीन गुणों की प्रतिक्रिया के कारण अस्थायी रूप से प्रकट होते है वास्तविक(real) लगते है हालांकि ये अवास्तविक(imaginary) होते है।

हरे कृष्ण !