रिश्ते
अपने घर को छोड़कर दूसरे शहर में जाना और वहीं पर जाकर बस जाना कितना मुश्किल होता हैं।
अपनो को छोड़कर उन्हें रुलाना फिर गैरों को अपनाकर उनसें रूठना मनाना कितना अजीब होता है।
उस नए शहर में घूल मिलकर रिश्तों को बनाना कितना मुश्किल होता है।
फिर उस घुले मिले शहर को छोड़कर जाना फिर अपनों को रुलाना कितना रोना आता है....!
'©अमन कुमार (विक्की)
