गलतफहमियाँ
बस...गलतफहमियों में फँस गई कश्ती हमारी, वरना, वादे तो हमने भी पूरे सात जन्मों के किए थे ।
रीत के उस डोर से प्रीत के इस छोर तक, अनगिनत किश्तों में हम उनके लिए मरकर जिए थे ।
दूर सी वो मंज़िले मुश्किल भरी आसान सी, मिट गई हस्ती हमारी यूँ घूँट आँसू के पिए थे ।
©#कुमार
