जिन्दगी को परेशान करने वाले चार लफड़े
पारिस्थितिकी तंत्र(Ecosystem) प्रकृति की सबसे छोटी संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई (structural and functional unit) है। इसके अंतर्गत जैव समुदाय एवं अजैव पर्यावरण आते है।जिनमें प्राण है वे जैव समुदाय से है। जो निष्प्राण है, निर्जीव है, गैर-शरीरधारी है, वे अजैव पर्यावरण से है। <!--more-- भौतिक जगत की सभी शरीरधारी जीव जैव समुदाय के अंग है।जैव समुदाय दो भागों में विभाजित है- उत्पादक एवं उपभोक्ता। पेड़-पौधे उत्पादक है। पेड़-पौधों को भक्षण करने वाले उपभोक्ता है।
पेड़-पौधों को भक्षण करने वाले प्रार्थमिक उपभोक्ता (शाकाहारी यानि herbivorous) है। प्रार्थमिक उपभोक्ताओं को खाने वाले द्वितीय उपभोक्ता (माँसाहारी यानि Carnivores या Omnivores) है। द्वितीय उपभोक्ता को अपना आहार बनानेवाले तृतीय उपभोक्ता (Top Carnivores) हैं। इस प्रकार खाद्य श्रृंखला का निर्माण होता है।
खाद्य श्रृंखला के माध्यम से ऊर्जा का हस्तांतरण उत्पादक से उपभोक्ता में होता है। पारिस्थितिकी में ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत सौर ऊर्जा है।प्रार्थमिक उत्पादक (पेड़-पौधे) अजैव पर्यावरण से पोषक तत्व (जल, खनिज लवण,इत्यादि) एवं सूर्य की ऊर्जा (प्रकाश ऊर्जा ) लेकर भोजन बनाता है। इस भोजन को वे अपने फल, फूल, तना, आदि में संग्रहित करते है।इस प्रक्रिया में परोक्ष रूप से सौर ऊर्जा का संग्रहण भोजन में होता है।
जैव समुदाय एवं अजैव पर्यावरण के मध्य विभिन्न प्रकार का आदान-प्रदान होता है।यह आदान-प्रदान ऊर्जा (भोजन ) एवं अन्य रूपों में होता है।पारिस्थितिकी में मौजूद कार्बन चक्र, नाइट्रोज़न चक्र, ऑक्सीजन चक्र, जल चक्र , आदि के दवरा पारिस्थितिकी के इन आदान-प्रदन को हम भली-भाँति समझ सकते है।
जैव समाज की चार मूल जरूरतें (basic needs) है। भोजन, जैव समुदाय की पहली जरुरत है। नींद , जैव समुदाय की दूसरी जरुरत है। सुरक्षा, जैव समाज की तीसरी जरुरत है। और सेक्स , जैव समाज की चौथी मूल जरुरत है। अपने इन चार जरूरतों को जैव समुदाय का प्रत्येक जीव अपने-अपने अनुसार पूरा करता है।
प्रत्येक जीव अपने अनुसार भोजन करने को स्वतंत्र है।जैसे- आदमी शाकाहारी या माँसाहारी दोनों हो सकता है। नींद की मात्रा एवं नींद लेने के तरीके हर जीवों के अलग- है। ध्रुवी भालू छः महीने तक सोता है। वहीं जंगली हाथी मात्रा दो-तीन घंटे तक सोता है। आदमी लेटकर तो घोड़े खड़े-खड़े सो लेता है।अलग-अलग जीव अपनी सुरक्षा भी अलग-अलग ढंग से करता है। मनुष्य मिसाईल और वैक्सीन से अपनी सुरक्षा करता है तो साँप डंक से अपनी सुरक्षा कर लेता है। सेक्स की जरूरतें भी हर जीव की अलग-अलग होती है। कुछ मनुष्य ब्रह्मचारी जीवन बिता देते है तो गोरैया, कबूतर, आदि पक्षी एक दिन में 300 बार सेक्स करता है, वहीं शेर पुरे साल में सिर्फ एक बार सेक्स करता है ।
जैव समुदाय का प्रत्येक जीव भोजन, नींद, सुरक्षा और सेक्स के चार बँधन से बँधा हुआ है। जैव समुदाय का सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य है। मनुष्य बाँकी जीवों से भिन्न है। 'धर्म के पीछे के राज' के अगले अंक में हम मानव जीव और मानव जीवन के बारे में बात करेंगे। जानते रहिये-'धर्म के पीछे का राज'।
©#राहुल देवाशीष
