Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

ये जवानी फिर कहाँ

सैर कर दुनियाँ की ऐ-गालिब, ये जिन्दगानी फिर कहाँ। जीवन तो गुजर जायेगा, ये जवानी फिर कहाँ॥

गुस्ताखी की तो है मैंने, महफिल में बेबाक बोलने की। जो बातों को कण्ठहार बना ले, ऐसी जुबानी फिर कहाँ॥

जज्बातों से झलकने वाले, तेरे गुरूर को तोडूँ मैं कैसे ? मुझसे मिलने के बाद तेरी, सचल मनमानी फिर कहाँ॥

अंहकार न कर मेरे दोस्त, अपनी "गात-ऐ-सौन्दर्य" का। अगले पड़ाव में जीवन के, इस उम्र की रवानी फिर कहाँ॥

ओछेपन की कश्मकश में, न भूल उन गरीबों को। मुस्कान ही है वरदान जिनका, ऐसी मेहरबानी फिर कहाँ॥

निरूपम जीवन को, सत्कार्यों की मुट्ठी से कसके रखो। रेत सी फिसली तो न कहना, वो जीवन फिर कहाँ॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य