Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·1·

विद्यालय पर निबंध

मंगरुआ सहमा हुआ एगो कोना में देवाल से चिपका जा रहा था, और फुलेसर मास्टर एक हाथ मे डंटा तो दूसरे हाथ मे मंगरुआ की काँपी लेकर उसकी ओर बढ़े आ रहे थे।

मास्टर साहेब फिर चिचियाये - अबे बोलता काहे नहीं है$$$....? क्या एहि पढ़ाए थे हम्म$$$$$...…......?

मंगरुआ थोड़ा हिम्मत करके बोला - लेकिन माटसाब आप ईइस्कूल के जो लच्छण बताये थे उऊऊ$$$ त मुझे कभी दिखबे नहीं किया ?इई से जो दिखा ओही लिख दिया, ईमनदारी से...

का दिखा बे हरिश्चंदर की औलाद$$$$$.....? त जो दिखेगा वही लिख देगा ? अब तुमसे एगो निबंध लिखावे खातिर स्कूलवा क$ मुगल गार्डन बना दें ?

शान्ति-प्रिय हेडमास्टर साब ने शोरगुल सुना तो मनोहर कहानियां का नवीन संस्करण कांख में दबाये कक्षा में दाखिल होते ही पूछा - ई सब का है माट साब ? काहें शोर मचाये हुए हैं ?

फुलेसर गुरुजी डंटा को मंगरुआ के पेट में कोंचते हुए गरजे - इसी से पूछिए सर, देखिए विद्यालय पर क्या निबंध लिखा है इस बकलोल ने ???

हेड मास्टर साहब ने मंगरुआ की कॉपी पर नजर दौड़ाई, लिखा था...

मेरा विद्यालय गांव के बाहर मुर्गीबाड़े के बगल में स्थित है ! मुर्गियों की बदबू से जीना हराम हो गया है ? तीन फाटक पहले से गायब थे और चौथा हेडमास्टर साहेब खुद रिक्शा पर लदवाकर अपने घर ले गए ? जाड़ा और गर्मी में तो ज्यादा दिक्कत नहीं होता है, लेकिन, बरसात में क्लास के अंदर भी बरसाती ओढ़ के बईठना पड़ता है ? अब तो कुत्तों के साथ-साथ सियार भी आते-जाते रहता हैं। एक बिजली वाला पंखा बिगड़ा तो हेडमास्टर साहेब सारा पंखा खुलवा ले गए बनवाने के लिए , तबसे दु बारिस गुजर गया आज तक एको पंखा बनके नहीं आया...?

आगे और भी था लेकिन पढ़ने के बजाय हेडमास्टर साहेब ने दूसरे मास्टर मुखलाल के हाथ से छड़ी ले ली और मंगरुआ पर गरजते हुए बोले - रे झुट्ठा कहीं का$$$ दरवाजे और पंखा का बिल मेरे नाम से फाड़ने से पहले सच्चाई पता किया तूने...???

मंगरुआ मन ही मन हनुमानजी का ध...

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