Gopal Kumar
Gopal KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

मंदिर, अपराध और अपराधी !!

इतिहास गवाह है कि मंदिर, अपराध और अपराधियों का बहुत ही गहरा सम्बन्ध रहा है हमेशा से...! बात सिर्फ दुबे जी का नहीं है बात उन सारे शातिर लोगो का है जो मंदिर में जाकर लोट लोट कर और उठक बैठक लगा कर अपने कुकृत्यों के लिए माफ़ी माँगते रहते है अपने भगवान से...!

कुछ लोग बड़ी क्यूट बात कहते है कि मंदिर में जानें से मन को शान्ति मिलता है इसलिए इंसान जाता है....! एक बात हमे कभी समझ में नहीं आया कि बिना गलत काम किये कोई इंसान अशांत हो कैसे सकता है और अगर गलत काम किया है तो फिर ये मंदिर में एक दो किलो लड्डू, कुछ रुपये के रिश्वत और उठक बैठक लगाने से ये आपने आप को अपराध मुक्त और आत्मिक शान्ति कैसे प्राप्त कर लेते है ये घतिहर लोग..??

अगर सच में लोग कोई भी कुकृत्य करने के बाद इस तरह से अपराध मुक्त और अपने अशांत मन को शांत कर लेते है , तो फिर सरकार को मंदिर और मंदिर जैसे अन्य धर्म के धार्मिक संस्थाओ को क्राइम लॉन्डरिंग के श्रेणी में लीगल तरीके से समायोजित करना चाहिए !

मंदिर को सिर्फ वास्तुशिल्प का नायब नमूना के रूप में देखने वाले लोग भावुक ना हो क्योंकि यहाँ मंदिर तोड़ने की बात नहीं हो रही है यहाँ बस मंदिर में चल रही क्राइम लॉन्ड्रिंग की बात की गयी है !!