Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·1·

कुछ बातें अधूरी हैं

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी जरूरी है। बिछुड़ना मजबूरी था, मिलना भी जरूरी है॥

मन न लगता है बिछुड़े, दोस्तों के बिना। पुरानी यादों को याद कर थोड़ा, मचलना भी जरूरी है॥

समेंट न पाये अन्तिम लम्हों की यादों को। मुट्ठी तो कसी, पर यादों की रेत का फिसलना भी मजबूरी है॥

परीक्षायें तो काट ली अब गिन रहें हैं दिन आने को। दिल जोरों से धड़कता है, ये सांसों को समझना भी जरूरी है॥

जन्म दिवस भी दीप यज्ञ बिना अभी अधूरा है। महाकाल के शुभाशीष का, मिलना भी जरूरी है॥

मन ऊब सा गया है, उस दिव्य परिसर के बिना। "संग-ए-दोस्ती" के लिये , संग में आना भी जरूरी है॥

कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी जरूरी है। हाँ,गर दूर रहना मजबूरी था तो अब,मिलना भी जरूरी है।। Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य