Saurabh Mamgain
Saurabh MamgainCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·

हिन्दू नववर्ष

दोस्तों आज हम अपने लोक त्योहारों को भूलते ही जा रहे हैं ,वो तो सोशल मीडिया है जो इन त्योहारों की झलकें गाहे-बगाहे दोस्तारिया की शक्ल में दिखा जाती है वरना हमारी हज़ारों साल पुरानी कमाई हुई सांस्कृतिक विरासत हम भूलते जा रहे हैं जो हमे प्रकृति और इंसानियत के करीब लाती है। लेकिन आज स्थिति दूसरी है और नतीजतन इंसान ही इंसान का शत्रु और प्रकृति से खिलवाड़ का नंगा नाच हो रहा है।

मित्रों जब मैं दृष्टिपात करता हूँ तो मुझे बहुत कष्ट होता है कि हम आधुनिकीकरण के नाम पर अपनी वैभवशाली परम्परा और गौरवशाली इतिहास को पीछे छोड़ पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति का अंधानुकरण कर रहे हैं और भारतीय सभ्यता और संस्कृति को हीन समझने की भूल कर रहे हैं। जबकि हिंदुस्तान की पहचान उसकी संस्कृति और यहाँ रहने वाले हर हिन्दू के संस्कारों के बुते ही विश्व पटल पर जानी जाती रही है और इसी नाते हमें विश्व गुरु का तमगा दिया जाता रहा है .. .लेकिन अफ़सोस ..मित्रो हमने आज वो तमगा खो दिया और इस सबके जिम्मेदार हम स्वयं हैं।

चाहे वो सामाजिक क्षेत्र की बात हो या सांस्कृतिक या फिर आर्थिकी हो .... हम पिछड़ते चले जा रहे हैं और इसका एकमात्र कारण स्वयं को हीन समझना ही है .. हमारा कुछ युवा वर्ग हमारे लोकपर्वों /तीज त्योहारों को ढकोशला बताते हुए उसे नजरअंदाज करते हैं लेकिन मैं बता दूँ कि हमारे इन पर्वों या मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक कारण भी निहित होते हैं और ये सामाजिक और आर्थिक परिदृश्यों पर भी हमें सबल बनाते हैं। प्रकृति पूजा के माध्यम से भी हम पर्यावरण संरक्षण का सन्देश प्राचीन काल से देते आ रहे हैं जो आज पश्चिमी देश , पर्यावरण के दोहन की पराकाष्ठा पार करने के बाद अलग -अलग संस्थाओं के माध्यम से देने का एकमात्र ढोंग कर रहे हैं।

मित्रों मेरी वेदना तब चरम पर होती है जब देखता हूँ क़ि हम हिंदुस्तानी ,ईसाई पर्व क्रिसमस बड़े धूम - धाम से मनाते हैं और अपना लोकपर्व भूल जाते हैं। और ये विडंबना कहीं न कहीं हमारे मनोमष्तिष्क को उपनिवेशीकरण की ऒर ले जाने का संकेत है। आज हमारे परिधानों में भी जो बदलाव आया है वह भी कहीं न कहीं हमारी अपसंस्कृति का ही परिचायक है।

दोस्तों ये गंभीर समस्या है इससे केवल एक क्षेत्र प्रभावित नहीं है बल्कि ये एक अन्तर्सम्बन्धित समस्या है जो हर क्षेत्र को प्रभावित करके अपने आगोश में लेती चली जा रही है ... इस पर विचार करना होगा।

मित्रों आगामी हमारा हिन्दू नववर्ष प्रारम्भ होने जा रहा है ... आप सभी इसका स्वागत उसी उत्साह और उमंग से करें जैसे आप ग्रेगोरियन कैलेंडर का नववर्ष मनाते हैं। जैसे हमारा धुर प्रतिद्व्न्दी चीन अपना नववर्ष बड़े उल्लास से मनाता है (हिंदुस्तानी मीडिया और समाचार पत्र भी उसका महिमामंडन करते नजर आते है ) उसी प्रकार हमको भी इसका आयोजन करना चाहिए और निवेदन इस दलाल मीडिया से कि थोड़ा समय निकाल हिन्दू नववर्ष का भी प्रसारण करें क्योकि तुम भी हिंदुस्तानी हो और यहीं का खाते हो।

बहरहाल ... लेखनी को विराम देते हुए और आशा करता हूँ कि हम सभी इस पर विचार करेंगे जो कि हमारा परम् कर्तव्य भी है। और अंत में आप सभी को आगामी #हिन्दू नववर्ष की शुभकामनायें देता हूँ , ये वर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो और आप सभी के जीवन में खुशहाली लाये। ?