Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

गांव हमारा

खुल गई आखिर, डोसा की दुकान। वतानुकालित रेस्टुरेंट, बस पास ही। गांव के चौराहे पर, सब वाव वाव है।

होम डिलीवरी सुविधा है, दूरी की चिंता नहीं। लिया टैस्ट बस डोसा का, पहली बार टेकारी में। दिल बाग बाग हो गया, अब डोसा की भी चिंता नहीं।

ऐसा है, गांव का विकास, शहरों से तालमेल करता हुए। है सभी, मौल भी, वातानुकूलित सैलून की दुकान। सब सुविधा है, पास ही, ये है अपना आज का गांव।

गांव घर सी है, प्यारी सी सब। बढ़ता गांव, बढ़ता जीवन स्तर। आज दूरियां घटा दी, इंटरनेट ने।

घर बैठे ही ,कर सकते सब। शिक्षा, स्वास्थ्य, उच्च जीवन स्तर। हो गई है, अब घर गांव की बात।

अगला आर्थिक क्रांति, होने को है गांव से। होंगे सभी सुविधा, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। सभी होगी गांव घर की बात, होगा अपना उच्च जीवन स्तर।

गांव हमारा संगम होगा, आधुनिकता एवम् संस्कृति की। गांव घर बढ़ेगा, तभी तो देश बढ़ेगा। भारत से इंडिया तक, सारे विश्व का केंद्र ये गांव होगा।

खुल गई आखिर, डोसा की दुकान। वतानुकालित रेस्टुरेंट, बस पास ही। गांव के चौराहे पर, सब वाव वाव है।

#गांव #रूरल #StandardOfLiving

©#मिथिलेश कुमार