अंधेरी राह
अंधेरी राहों पर, मस्ती अलग सी। छोटी एक पुलिया, जैसे ही गुजरा उससे। एक सनसनाहट सी, अलग सा था अनुभव।
थोड़ा डरावना सा, पर मजा भी था। अंतराल है छोटी सी, शांत सबकुछ। अंधेरी दोनों ओर, बीच में है रास्ते। अन्दर एक सुनहरी सी, नदी बहती हुई।
बिल्कुल सन्नाटा, बीच की रास्तों पर। नदी है दोनों ओर, अन्दर से। चला जा रहा था, अंधेरी राहों पे। मस्ती अलग से, अलग सा था अनुभव।
जीवन के राहों में भी, कितने ऐसे पड़ाव आते। बिल्कुल सन्नाटा होता, डरावना लगती सभी। वो भी मस्ती छिपी होती, डरावनी सी। चला जा रहा था, अंधेरी राहों पे।
अंधेरी राहों पर, मस्ती अलग सी। छोटी एक पुलिया, जैसे ही गुजरा उससे। एक सनसनाहट सी, अलग सा था अनुभव।
#अनुभव #अंधेरिराहें
©#मिथिलेश कुमार
