Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
15 Oct 2021·1 min read·

कर्तव्य पथ

कर्तव्य के पथ पर अड़ा योजन दूर खड़ा हूं नील गगन के एक कोने से न जाने किस-किस से लड़ा हूं ।

मेघों को मात देता हूं पर अंधियारों से टूट जाता हूं।

फिर भी भिनभिनाती काली रातों को चित कर उजियारे का परचम लहराता हूं ।

हर बार गिरता हूं गिर कर संभलता हूं खून से सने इस लथपथ पथ पर खड़ा हूं।

©अमन कुमार (विक्की)