Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
11 Mar 2025·1 min read·

कभी लौटो गांव मे

कभी लौटो गांव मे तो हो आना, वो मोहल्ला जहां बचपन इठलाया करता था हो आना, वो चौराहा जहां गिल्ली डंडा शोर मचाया करता था झांक आना वो पाठशाला, जहां ककहारे का 'क' लड़खडाया करता था झांक आना उस बनिए की दुकान में जहां पाए हुए पैसों से चीजें खरीद लाते थे हो आना उस तालाब पर जहां तैराकी पर गोता लगाते थे होकर आना भूत बंगला के पास से जहां हुई खड़खड़ाहट से रूह कांप जाया करता था हो आना वो बगीचा जहां से खट्टे मीठे आम चुराया करते थे और फुर्सत मिले तो हो आना पुराने मित्रों के घर जहां बदमाशी को चार चांद लगाता था।

©अमन कुमार (विक्की)