Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

हाँ...मैं कश्मीरी पंडित हूँ

क्या बताऊँ, कैसे कहूँ ? कि मैं कहाँ-कहाँ से खंडित हूँ ? मैं कश्मीरी पंडित हूँ ! हाँ...मैं कश्मीरी पंडित हूँ !

डल की झीलें रोई थी तब शिकारे तक टूट गए ? यादों में जो जिन्दा अब तक उस जन्मभूमि से वंचित हूँ मैं कश्मीरी पंडित हूँ ! हाँ...मैं कश्मीरी पंडित हूँ ! <!--more-- अस्मत खोई , खुद पर रोई अपनों से ही दंडित हूँ ? क्या बताऊँ, कैसे कहूँ ? कि मैं कहाँ-कहाँ से खंडित हूँ ? मैं कश्मीरी पंडित हूँ ! हाँ...मैं कश्मीरी पंडित हूँ !

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