दीपोत्सव
दीपों के उत्सव में एक दीया सृष्टि संचालक के नाम जले। एक दीया उनके हिस्से, जिनके आँचल के छाँव में हम पले। एक दीया उनके, जिनके अँगुलियों को थाम ,हमारे लड़खड़ाते पाँव चले। एक दीया उनके चरणों में, जिनके त्याग, समर्पण से ज्ञान के दीप जले। एक दीया रणबाकूरों के नाम जो शत्रुओं का फन कूचले। उनके हिस्से भी एक दीया जले, जो नवोन्मेष में खुद का सूख चैन भूले। जेठ भरी दुपहरी में जिसने रक्त से सिंचा हो फसलों को ,एक दीया उनके नाम भी जले। अथक परिश्रम के बलबूते जिनके जीवन ढ़ले, एक दीप उनके नाम भी जले। एक दीया उनके नाम भी जगमगाये ,जो मानव का प्राण बचाये। उनके हिस्से भी जगमगाये एक दीया, जिसने जीवन मातृभूमि के उत्थान में लगाये। आओ एक दीया उनके नाम भी जलाये जो वेदना डूब के भी मुस्कुराये, खिलखिलाये। एक दीया ऐसा जलाये जो मशाल बन मिसाल बन जाए। एक दीया ऐसा जले, सम्पूर्ण वसुधा शरण पाये जिसके छाँव तले। एक दीया स्वयं के लिए जलाये, जिससे परहितार्थ जीवन के भाव उमड़ आये। © सतीश कुमार पाण्डेय समस्त देशवासियों को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये एवं बधाई।
