अर्जुन
क्या अभिमन्यु के मारे जाने में ! अर्जुन का कोई हाथ नहीं ?
जब जानते थे वो सच सारा ! फिर युद्ध-क्षेत्र में क्यूं साथ नहीं ?
क्या राज-मोह में मुख मोड़ लिया ! या अति विश्वास में अकेले छोड़ दिया?
माना धनुर्धारी तू दुनियां में श्रेष्ठ रहा ! क्या हुआ जो अपनों को मरते सहा ?
जब थे माखनचोर संग उनकी कला ! या गुरुजनों का आशीष ना फला ?
इसका भी कर पाते संधान यदि तुम कहलाते युक्ति पति सदा ?
©#कुमार
