मन की अनुपस्थिति
समस्या क्या है?
लम्बे समय तक लोगों की,खासकर युवाओं की,मनोदशा का अध्ययन करने के दौरान मैंने पाया है कि बहुत से लोगों को कोई बात एक बार में समझ में नहीं आती.बात पूरी हो जाने के बाद वे ऐसे सवाल करते है जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं हो.हालाँकि वह व्यक्ति वहाँ फिजिकली मौजूद रहता है लेकिन मेंटली कहीं और ही रहता है.एक स्वाभाविक सी जिज्ञासा होती है कि ऐसा क्यूँ होता है ? ऐसा किसी अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोगों के साथ ही नहीं बल्कि काफी स्मार्ट लोगों के साथ भी होता है.मेरे एक भाई है जो एक NGO में प्रोजेक्ट मैनेजर है उनके साथ भी ऐसी घटना घटती है.
कारण क्या है?
ऐसा वे लोग जानबूझ कर नहीं किया करते बल्कि उनके दिमाग की आदत कुछ इस तरह बन चुकी होती है कि वे ऐसा हो जाने से अपने आप को रोक नहीं पाते। इसके कईकारण है जैसे-इनमें सुनने की कला का अभाव होता है. इनका ध्यान कहीं और होता है.दिमाग अस्थिर रहता है.शब्दों को ये समझ नहीं पाते।ये अपने परिस्तिथि या हालत से डरे होते है,इत्यादि
समाधान क्या है?
चीजों को खंड-खंड करके समझा जाये।बातचीत के दौरान शब्दों को पकड़ने का प्रयास किया जाये।गाने आदि सुने तो उसकी बोल(lyrics )पर गौर किया जाये।ध्यान करना भी अच्छा उपाय है.
कठिन शब्द और उनके अर्थ :
- मनोदशा-mood;
- फिजिकली-शारीरिक रूप से;
- मेंटली-मानसिक रूप से
