Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

हिन्दुस्तान बसता हैं

अमीरों के ख़्वाबों में तो नित लंदन और पेरिस हैं, किसानों और मजदूरों में हिन्दुस्तान बसता हैं।

ना थिएटर , ना पार्क , ना आलीशान महलों में, यहाँ बस खेत-खलिहानों में हिन्दुस्तान बसता हैं ।

ना अमीरों की तिजोरी में, ना मठों के खज़ाने में, यहाँ गुरुद्वारे के लंगर में हिन्दुस्तान बसता हैं ।

ना मंदिर की आरती में, ना मस्ज़िद के अजानों में, फुटपाथ पर बिलखते नौनिहालों में हिन्दुस्तान बसता हैं।

ना पुजारी के आह्वानों में, ना ईमामों के फरमानों में, शहीदों के शहादत में हिन्दुस्तान बसता हैं ।

जहाँ हिन्दू के साथ मुसलमान हँसता हैं, हर उस जगह पर हिन्दुस्तान बसता हैं ।

©#कुमार