Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

हिंदी का अपमान

हिंदी से क्यों दूर होते गए, अपनी पहचान खोते गए। लड़ रहे है, अपनी अस्तित्व की लड़ाई। हिन्दुस्तान की पहचान खोते गए। भारत से इंडिया बन बैठे, पर क्या पाए। अपनी पहचान खोते गए।

जन-जन की भाषा, अब देखी जाती उपेक्षा से क्यों? भारत मां रो पड़ती होगी, क्रुद्ध हो। जो कभी थी, विश्व की जन्मदात्री। हिंदी की फैला था, विश्व साम्राज्य। गौरव समझी जाती थी, मातृभाषा उपयोग।

अब इसकी अपेक्षा क्यों, निरादर क्यों। हिंदी का अपमान, भारत का अपमान है। झुटला नहीं सकते, गलत दलीलों से। 'एकता विविधता में ' वाली बात कह कर। हिंदी से क्यों दूर होते गए, अपनी पहचान खोते गए।

हर राष्ट्र का होता है, एक व्यक्तित्व। होती है एक पहचान, अपनी होने में क्या दिक्कत है। क्यों लड़ पड़ते, हिंदी - अहिंदी के नाम पर।

क्यों ना प्रयोग करे टेक्नोलॉजी, भाषाओं की दूरी खत्म करे। अपनी भाषा बोलो, इसमें कहां मनाही है। भारत की एक भाषा हो, जिससे जानी जाए पूरे विश्व में।

हम है, भारत एक महान। विविधता में एकता है हमारी पहचान। भारत मां का एक व्यक्तित्व, हिंदी । करे आदर सब इस मत का, हिंदी का सत्कार करे। भारत की भी एक भाषा हो, जिससे जानी जाए पूरे विश्व में।

चले भारत का गौरव बढ़ाए, हिंदी का सत्कार करे। करे मान हिंदी का, प्रयोग करें इसे फक्र से।

चले लौटाए अपनी पहचान, लौटाए हिन्दुस्तान का गुमान। सभी भाषाओं करते आदर हम, करते प्रयोग हम।

भारत की अपनी स्वतंत्रता है, पहचानी जाए एक भाषा से। वहीं भाषा तो हिंदी है, हिंदी का सत्कार करे हम। ये हिन्दुस्तान हमारा है।

हिंदी दिवस की शभकामनाएं। भारत माता की जय।

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©#मिथिलेश कुमार