डटकर चल
कुछ करना है, तो डटकर चल। थोड़ा दुनियां से हटकर चल। भाग्य पर तो सभी चल लेते है, कभी इतिहास को पलटकर चल।
बिना काम के मुकाम कैसा? बिना मेहनत के, दाम कैसा? जब तक ना हासिल हो मंजिल तो राह में, राही आराम कैसा?
अर्जुन सा, निशाना रख, मन में, ना कोई बहाना रख। जो लक्ष्य सामने है, बस उसी पे अपना ठिकाना रख।
सोच मत, साकार कर, अपने कर्मो से प्यार कर, अपने कर्मो से प्यार कर। मिलेगा तेरी मेहनत का फल, किसी और का ना इंतजार कर।
जो चले थे अकेले उनके पीछे आज मेले है जो करते रहे इंतजार उनकी जिंदगी में आज भी झमेले है!!
सोच बदल, जिंदगी बदल कुछ करना है, तो डटकर चल
©#आदर्श मौर्य
