Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

बदलाव

आप करते हो नित बातें बड़ी-बड़ी ; गोदामों में सड़ती हैं अनाजें पड़ी-पड़ी ! गाय पर भी होती हैं हर रोज राजनीति ; पर, गौशालाओं में गायें मरती हैं नित खड़ी-खड़ी ! <!--more-- पहले बांटा हमें मंदिर-मस्जिद में ; फिर मंदिर-मंदिर में बांट दिया ? बदलाव आया कुछ इस कदर कि ; हमें अपनों में ही छांट दिया !

बदलाव की बातें कर करके सबकुछ तो हैं बदल रहा ! किसानों को अन्नदाता कहा पर, उसने ही हर ज़ख्म सहा ? कहलाते हो राष्ट्रभक्त, फिर सीमा पार क्यूँ नहीं बताते हो ! हैं मेरे अंदर जो आग लगी तुम उससे दीया जलाते हो ?

©#कुमार