Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·

आप किसके लिये जी रहे हैं?

अपने प्रोफेशनल दोस्तों से जब मेरी बात होती है और मैं उनसे पूछता हूँ कि-भाई तेरी लाईफ कैसी चल रही है?तो समान्यतः उधर से जबाब मिलता है-'मत पूछ यार!ज़िंदगी तो झंड बनी हुई है।'यहाँ झंड का मतलब होता है-जिसपर झण्डा गड़ा हो।खेल के मैदान के झंडे की तरह जहाँ झंडे को छूने के लिए सभी जी-जान से भागते है।आपकी लाईफ कैसी है,वही झंड वाली या मस्ती वाली?अपने से यह सवाल पूछिये तब आगे पढ़िये।

इस प्रश्न के मिले-जुले उत्तर हो सकते है।जिसके कई कारण हो सकते है।कुछ लोगों को अपने काम से शिकायत होती है,कुछ को अपने इनकम से निराशा होती है तो कुछ लोगों को अपनी महत्वाकांक्षा परेशान करती रहती है। कुछ की फैमिली प्रोब्लेम है तो कुछ लोग रिलेशनशिप की वजह से तंग होते है।

पहले और अभी की लाईफस्टाईल में जो बेसिक अंतर आया है वह है हमारी सोच में परिवर्तन का।जैन धर्म में धन-संग्रहण को अनैतिक बताया गया है।हमारे शरीर का भी कुछ ऐसा ही मेकेनिज्म है कि जितना जरूरी है उतना ही यह ग्रहण करता है।अगर जरूरत से ज्यादा खा लिया जाता है तो वोमेटिंग हो जाती है।वायुमंडल में ऑक्सिजन बहुत है लेकिन हमारा फेफड़ा उतना ही लेता है जितना इसे चाहिए।

धनोपार्जन,ज्ञानोपार्जन,शारीरिक दोहन में हम अति करते है।यही से समस्या खड़ी होती है।अगर इन सब चीजों में हम संतुलन बना कर चलें तो हमारी लाईफ झंड नहीं बनेगी,मस्ती वाली बनेगी।मेरा कहने का मतलब यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि मैं आपलोगों को निठल्ला बनने कि सलाह दे रहा हूँ।मैं आपको अपनी क्षमता का भरपूर लाभ उठाने को कहता हूँ आप कर्मठ,लगनशील और विजेता बनें लेकिन इस शर्त पर नहीं कि आपकी अभी कि जिंदगी ही नीरस बन जाए।

आप अपने परिवार के लिये,अपनी कंपनी के लिए,अपने बॉस के लिए,अपने जीवनसाथी के लिए,अपने बच्चों के लिए समय तो निकालें ही।आप उनके परवरिश और उनकी तरक्की के लिए मेहनत करें ही।लेकिन अपने लिये भी कम-से कम एक घंटा या आधा घंटे का वक़्त निकालिए।

एक एकांत स्थान में बैठकर अपनी दिनचर्या के बारे में,अपने खान-पान के बारे में,अपने व्यवहार के बारे में वहाँ सोचिए।यह जगह पार्क हो सकता है,आपके घर की पूजा-स्थली हो सकता है,नदी या तालाब के किनारे या आपका अपना बिस्तर हो सकता है।जिस प्रकार शांत जल की सतह पर एक छोटा सा कंकड़ फेंकने पर उससे उठी तरंग को किनारे तक पहुँचते-पहुँचते विलीन हो जाता हुआ देखा जा सकता है उसी प्रकार आपके शांत मन के दर्पण में आप अपनी अच्छाइयों और बुराइयों को तरंगित होते हुए देख पाएंगे।

दोस्तो,कभी भी हमें खाली समय और पर्याप्त समय नहीं मिल पता।कभी भी अपनी जिम्मेवारियों से हम चैन नहीं पा सकते।इसलिए सब कुछ सही हो जाने का इंतजार मत करिए।आज से और अभी से अपनी लाइफ को जीना शुरू करिए।मैंने जो तरीका बताया है उससे आपका नुकशान नहीं होने जा रहा है।आप आपने आप में मस्त रहेंगे तो अपनी सारे कर्तव्यों का अच्छे से पालन कर पाएंगे।