बाबा साहेब आंबेडकर
बाबा साहेब आंबेडकर से प्रेरणा लेने की छिना झपटी ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि बाबा साहेब में कुछ तो खास हैं जो इनके समकालीन किसी और में नहीं हैं !
खास जो भी हो पर सफ़ेद कुरता वाले महानुभावो को आकर्षित करने वाली इतनी मजबूत आकर्षण छमता शायद किसी और नेता में नहीं हैं! चाहे गांधी,नेहरू या पटेल ही क्यों ना हो !
आंबेडकर की लोकप्रियता देख कर बहुत सारे उनके समकालीन नेता के आत्मा तरस रहे होंगे कि काश हम भी दलित होते तो कोई ना कोई हमारा भी कॉपी राइट करा ही लेता ! मायावती से मोदी तक सब पूरी ताकत लगा के आंबेडकर को अपनी प्रेरणा बता रहे हैं ,पता नहीं ये वोट कि प्रेरणा हैं या बाबा साहेब के कर्मो की !
बाबा साहब की इतनी तार्किक आत्मा थोड़े ही चुप बैठी होगी वो भी विचार कर रहे होंगे की ये माया से मोदी तक ये हमारे विचारों से प्रभावित हैं या हमारे जाति के वोट से प्रभावित हैं !
पता नहीं सही क्या हैं पर इनलोगो की एक्टिंग देख कर तो जनता भावुक हो कर इनकी मंशा पर मुहर लगा ही देते हैं ! इसमे सफल वही हो पाता हैं जो सबसे अच्छा एक्टिंग कर लेता हैं !
अब तो यही लगता हैं कि ये सफ़ेद कुरता वाले महानुभावो ने आंबेडकर को "वोट के देवता" के रूप में अपने विचारभूमि से अब अपने कर्मभूमि पर लॉन्च करने की ठान ही ली हैं !
