Satish Kumar Pandey

Satish Kumar Pandey

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28 Apr 2021·1 min read

समझ नहीं आता क्या लिखूँ?

समझ नहीं आता -आज कल मैं क्या लिखू? वेदना लिखू या संवेदना लिखू? दिलों की कथा लिखू या दिखती व्यथ...

समझ नहीं आता -आज कल मैं क्या लिखू? वेदना लिखू या संवेदना लिखू? दिलों की कथा लिखू या दिखती व्यथा लिखू ? गूंजता चित्कार लिखू या मौत की रफ्तार लिखू ?

तड़पता परिवार लिखू या उजडता संसार लिखू ? थमते साँस लिखू या टूटते विश्वास लिखू? भूखों की मायूसी लिखू या चेहरों की उदासी लिखू? रोटी की तलाश लिखू या जलते हुए लाश लिखू?

वातावरण हताश लिखू या मौत की उमडती प्यास लिखू? दृष्टिगत मजबूरी लिखू या चाहत अधूरी लिखू? मानवी प्यार लिखू या बिखरता संसार लिखू? जन-जन का क्रंदन लिखू या ईश्वर का वन्दन लिखू?

मजबूरियों का दौर लिखू या गुंजित शोर लिखू? हूक्मरानों का फरमान लिखू या मौत का ऐलान लिखू? सुलगती चिताओं की ताप लिखू या राष्ट्रीय संताप लिखू? जिन्दगी और मौत की जंग लिखू या हर क्षण बदलते हुए रंग लिखू?

आँसू लिखू या रक्त की धार लिखू? जीवन लिखू या मौत की बौछार लिखू? उमंग की उम्मीद लिखू या जन्म- मरण की जिद्द लिखू? सज्जन का सदव्यवहार लिखू या दुर्जन का भ्रष्टाचार लिखू?

शपथ की सौगंध लिखू या कूकृत्य की दुर्गंध लिखू ? मजहबी संघर्ष लिखू या मायूसी रूपी तम में डूबता हर्ष लिखू ? युद्धाओं का त्याग लिखू या अन्तर्मन में प्रज्वलित आग लिखू? अन्त्येष्ठी हेतु छिड़ा संग्राम लिखू या शोकाकुल नगर और ग्राम लिखू?

©सतीश कुमार पांडेय

वर्तमान परिस्थितियों से सबको मुक्ति दो भगवान । 28/04/2021

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