Satish Kumar Pandey

Satish Kumar Pandey

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25 May 2021·1 min read

आपके दिए तौफे को हमने भूलाया नहीं

आपके दिए तौफे को अब तक हमने भूलाया नहीं । राज कई दफ्न है मेरे सीने में ,मगर किसी को बताया नहीं ।...

आपके दिए तौफे को अब तक हमने भूलाया नहीं । राज कई दफ्न है मेरे सीने में ,मगर किसी को बताया नहीं । आपकी रहमत ऐसी रहीं कि अरसे बित गए मगर आँखों में आँसू आया नहीं । मैं तो तूफानों में भी शमा जलाता रहा, मगर दीया किसी का बुझाया नहीं ।

हौसलें दिए आप ऐसे बेशूमार, जिसे धारण कर कभी पीठ दिखाया नहीं । सीने पर प्रहार सहा , मगर कायर कहलाया नहीं । जब- जब शत्रुओं ने ललकारा, हूंकार उठा मैं पीठ कभी दिखाया नहीं । आपकी कृपा ऐसी रहीं कि दीनता, हीनता, मलीनता के भँवर में कभी समाया नहीं ।

आपके चरण में शरण ऐसी मिली कि मूढता के बंधन में बंध पाया नहीं । तिमिरांचल में भी जगमगाता रहा, अंधेरें के आँचल में मुँह छूपाया नहीं । वेदना रहा,लेकिन अपने दामन से प्रसन्नता, उमंग, उल्लास को हटाया नहीं । आपके दिए ज्ञान को कभी व्यर्थ गवाया नहीं ।

धन्य है आपके त्याग,समर्पण जिसे अबतक हमने भूलाया नहीं । आपके सिवा इस ह्रदय में अब तक कोई जगह बनाया नहीं । जब से मिला पनाह आपका, खुशियों को हमने भूलाया नहीं । होकर आपके शरणागत यह जीवन धन्य- धन्य किया बेकार यूँ ही गवाया नहीं ।

©सतीश कुमार पांडेय

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